Wednesday, March 12, 2014

हडताल है तो क्या... आज तो मयखाना सजा लो यारों

(लेखक-विशाल शर्मा)
राम राज में दूध मिला, कृष्ण राज में घी, कलयुग मे दारू मिली है भर-भर कर पी। ये जुमला इन दिनों सड़क पर दौड़ते ट्रकों और बसों पर शायरी साहित्य का हिस्सा बन कर नजर आता है। काफी हद तक ये आज के हालातों से इत्तेफाक भी रखता है। आज खाने को दाने ना हो लेकिन शराब होना जरूरी हो गया है। वहीं युवाओं में इसका बढ़ता क्रेज और ज्यादा घातक हो गया है। ये शराब रोज हजारों जिन्दगियां तबाह कर रही है। फिर भी इसको लेकर ना तो प्रशासन गंभीर नजर आ रहा है और न ही सरकार। सरकार के नुमाइंदे यानी नेता तो अपना वोट ..........
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